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A poem dedicated to Indian housewives

कमाल है, उसकी वजह से घर, घर होता है उस संग जागता, उस संग ही सोता है वह घर के कण-कण में रहती है फर्नीचर, पर्दों, रसोई के बर्तनों में बसती है फिर भी अपने वजूद को सबमें तलाशती है सबकी आँखों में अपने व्यक्तित्व की पुष्टि चाहती है ओ…

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