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यह मैं अपनी एक उपलब्धि मानता हुँ की मैंने उनकी एक एक रचना को पढ़ा है समझा है और जिया है और प्रतेक पर टिपणी करके  अपने तरीके से उसका विस्तार किया है शुरू में मैं अपने को केवल एक पाठक ही मानता था पर अब मैं अपने को उनकी इस यात्रा का एक सहयात्री मानता हूँ , उनकी हर उपलब्धि को अपनी उपलब्धि मानता हूं