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किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘भारतीय मनीषियों का जीवन दर्शन’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित

दिनांक 25/02/2026 को संस्कृत परिषद्, किरोड़ीमल महाविद्यालय तथा यूथ यूनाइटेड फॉर विजन एंड एक्शन (YUVA) के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्राचीन भारतीय मनीषियों का जीवन दर्शन’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का भव्य एवं सफल आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। तत्पश्चात् मुख्य अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर ज्ञानमयी व्याख्यानमाला का विधिवत् आरंभ किया गया। इसके उपरांत प्रथम सत्र में अतिथियों के स्वागत की गौरवशाली परंपरा का निर्वहन किया गया। विभाग के समस्त अध्यापकों ने सभी अतिथियों का स्मृति-चिह्न, पुस्तक एवं अंगवस्त्र भेंट कर भावपूर्ण स्वागत एवं अभिनंदन किया।

प्रथम सत्र में कार्यक्रम के संयोजक डॉ. हरेती लाल मीणा महोदय ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा व्याख्यानमाला’ के चतुर्थ पुष्प के रूप में विषय की प्रासंगिकता एवं उसकी वैचारिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। डॉ. राजेश कुमार महोदय (विशिष्ट वक्ता) ने वेदांत दर्शन एवं ‘पंचकोश’ की अवधारणा को सरल एवं प्रभावी ढंग से स्पष्ट करते हुए विद्यार्थियों को आत्मिक उन्नति के व्यावहारिक उपाय बताए। डॉ. धर्मेंद्र कुमार महोदय (मुख्य वक्ता) ने ‘मनीषी’ शब्द की व्युत्पत्ति एवं उसके गूढ़ अर्थ को समझाते हुए कहा कि प्राचीन ऋषियों का जीवन-दर्शन आज भी पूर्णतः प्रासंगिक एवं अनुकरणीय है। डॉ. प्रमोद कुमार महोदय (मुख्य अतिथि) ने दर्शन को ‘सत्य की साक्षात् अनुभूति’ बताते हुए कहा कि मनीषियों ने आत्मज्ञान के माध्यम से जीवन की जटिल समस्याओं के स्थायी समाधान प्रस्तुत किए हैं। प्रो. रामकिशोर यादव महोदय (अध्यक्ष) ने भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रभाव तथा समकालीन नीति-निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

द्वितीय चरण में डॉ. विजय नारायण महोदय (विशिष्ट वक्ता) ने चारों आश्रमों—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास—के माध्यम से संतुलित एवं अनुशासित जीवन का मार्ग प्रशस्त किया।

डॉ. अवधेश महोदय (मुख्य वक्ता) ने ‘पंचकोश’ की अवधारणा के आधार पर व्यक्तित्व विकास के विभिन्न आयामों पर बल दिया।

डॉ. देवेंद्र नाथ पांडे महोदय (मुख्य अतिथि) ने उपनिषदों के महावाक्य ‘अहम् ब्रह्मास्मि’ की व्याख्या करते हुए छात्रों में आत्मविश्वास, समानता एवं आत्मबोध की भावना जागृत की।

प्रो. एम. रहमतुल्लाह महोदय (अध्यक्ष) ने भारतीय जीवन-पद्धति के मूल स्तंभों पर चर्चा करते हुए उन्हें एक अनुशासित एवं सशक्त समाज की आधारशिला बताया।

सभी वक्तव्यों के उपरांत कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ललित पांडे महोदय ने सभी वक्ताओं, प्राचार्य महोदय एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का हृदयपूर्वक धन्यवाद ज्ञापित किया तथा उनकी गरिमामयी उपस्थिति के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।

द्वितीय सत्र का प्रारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. रूपेश कुमार चौहान महोदय के प्रेरक उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं भविष्य की रूपरेखा को स्पष्ट किया।

डॉ. नरेंद्र कुमार महोदय (मुख्य वक्ता) ने प्राचीन गुरुकुल पद्धति, ब्रह्मचर्य पालन एवं अहिंसा के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को योग एवं संयमित जीवन-शैली अपनाने की प्रेरणा दी। डॉ. बबीता सिंह महोदया (मुख्य अतिथि) ने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की अनिवार्यता पर विस्तार से चर्चा करते हुए एकाग्रता एवं आत्म-नियंत्रण में उसकी भूमिका स्पष्ट की।

डॉ. मेधावी जैन महोदया, संस्थापिका Dharma For Life ने इस सत्र की अध्यक्षता की एवं अपने सारगर्भित व्याख्यान में जैन धर्म की दार्शनिक परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ‘तीर्थंकर’ वे महापुरुष हैं जिन्होंने इंद्रियों एवं मोह-माया पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ‘केवल ज्ञान’ को प्राप्त किया। उन्होंने अपने पीडीएफ के प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव से लेकर अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी तक के जीवन, उनके प्रतीकों एवं उनके द्वारा प्रतिपादित दर्शन का विस्तारपूर्वक परिचय दिया। उन्होंने कुछ प्रमुख जैनाचार्यों के दार्शनिक ग्रंथों पर भी प्रकाश डाला एवं उनकी महत्त्वपूर्ण शिक्षाओं के विषय में छात्रों को बताया। जैन दर्शन के प्रमुख सिद्धांतों—अनेकांतवाद (वैचारिक सहिष्णुता) एवं अपरिग्रह (संसाधनों का सीमित उपयोग)—को वर्तमान वैश्विक संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक बताया। साथ ही विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत विश्व-शांति की आधारशिला बन सकता है।

कार्यक्रम के अंतिम चरण मे युवा के सह – संयोजिका डॉ. दीपिका शर्मा महोदया ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी वक्ताओं के अमूल्य विचारों की सराहना करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने वाले समस्त शिक्षकों, तकनीकी टीम एवं विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। शांति पाठ के साथ संगोष्ठी का सफलतापूर्वक एवं गरिमामयी समापन हुआ।

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