Skip to content Skip to sidebar Skip to footer

All Posts

A poem dedicated to Indian housewives

कमाल है, उसकी वजह से घर, घर होता है उस संग जागता, उस संग ही सोता है वह घर के कण-कण में रहती है फर्नीचर, पर्दों, रसोई के बर्तनों में बसती है फिर भी अपने वजूद को सबमें तलाशती है सबकी आँखों में अपने व्यक्तित्व की पुष्टि चाहती है ओ गृहणी आख़िर तू ऐसी क्यों…

Read more

A Tribute to The Modern Indian Girl

Hi friends, Some recent observations about the urban Indian girls made me write these lines. Despite all the conditioning of mind, through families, relatives & society; she is confident, fearless & ready to face the world. Enjoy reading. वह आज की युवा लड़की: - जो गालियों का उपयोग धड़ल्ले से करती है. - जो किसी के…

Read more